रविवार, 21 जून 2020

Autobiography Of Narendra Modi In Hindi - Page of history

हेलो दोस्तों मे राहुल सिंह चौहान आपके लिए pageofhistory  मे आज  Autobiography Of Narendra Modi In Hindi लेकर आए  है | कि कैसा रहा उनका चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने  का सफर | 


डरते तो वह हैं जो अपनी छवि के लिए मरते हैं मैं तो Hindustan की छवि के लिए मरता हूं और इसीलिए किसी से भी नहीं डरता हूं ऐसा कहना है दुनिया की सबसे शक्तिशाली लोगों में शामिल है | 


History Of India In Hindi : -

भारत के इतिहास मे लोकप्रिय प्रधानमंत्री Narendra Modi का जिन्हें हमारे देश की राजनीति की वजह से आप प्यार करें या फिर नफरत लेकिन उनके कार्यों को अनदेखा नहीं कर सकते दोस्तों वैसे तो मोदी जी का जीवन बहुत ही साधारण तरीके से शुरू हुआ मगर अपनी देशभक्ति अपने जज्बे और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने ऐसी सफलता हासिल की जिसके बारे में कोई कुछ भी नहीं कह सकता था वे एक बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए |



Biography Of Narendra Modi -Pageofhistory



अपने बचपन के दिनों में जब बच्चे खेलने कूदने में अपना समय व्यतीत करते हैं तब उन्होंने अपने घर की आर्थिक सहायता के लिए अपने पिता की दुकान में हाथ बटाए और train की डिब्बों में जा जाकर चाय बेची लेकिन दोस्तों अगर आपके अंदर अपने देश के लिए कुछ कर जाने की इच्छा होना तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं रह जाता कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो आइए दोस्तों हम शुरू से मोदी जी के चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक की अद्भुत सफर को detail में जानते हैं |




Narendra Modi का जन्म 17 सितंबर 1950 को Mumbai राज्य के मैदान जिले में वडनगर नाम के गांव में हुआ था दो तो बता दूं कि Mumbai राज्य पहले भारत का एक राज्य था जिसे 1 मई 1960 में अलग कर गुजरात और महाराष्ट्र बना दिया गया तो इस तरह अब मोदी जी का जन्मस्थान गुजरात राज्य के अंतर्गत आता है |



Narendra Modi के पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी था और मां का नाम हीराबेन मोदी है जन्म के समय उनका परिवार बहुत ही गरीब था और वे एक छोटी सी कच्चे मकान में रहते थे Narendra Modi अपने माता पिता की कुल 6 संतानों में तीसरे पुत्र हैं मोदी के पिता Railway Station पर चाय की एक छोटी सी दुकान चलाती थी जिसमें नरेंद्र मोदी भी उनका हाथ बताते थे और रेल के डिब्बों में जा जाकर चाय बेचते थे लेकिन हां चाय की दुकान संभालने के साथ-साथ मोदी पढ़ाई लिखाई का भी पूरा ध्यान रखते थे मोदी के टीचर बताते हैं कि नरेंद्र पढ़ाई लिखाई में तो एक ठीक-ठाक छात्र थे लेकिन में नाटकों और भाषणों में जमकर हिस्सा लेते थे और उन्हें खेलकूद में भी बहुत दिलचस्पी थी उन्होंने अपनी स्कूल की पढ़ाई वडनगर से पूरी की




15 साल की उम्र में Narendra Modi की सगाई जशोदाबेन चमन लाल के साथ कर दी गई और फिर 17 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक न्यूज़ के अनुसार नरेंद्र और जसोदा ने कुछ वर्ष साथ रहकर बिताएं लेकिन कुछ समय बाद नरेंद्र मोदी के इच्छा से वे दोनों एक दूसरे के लिए अजनबी हो गए लेकिन नरेंद्र मोदी के जीवन लेखक ऐसा नहीं मानते हैं उनका मानना है कि उन दोनों की शादी जरूर हुई लेकिन वे दोनों एक साथ कभी नहीं रहे शादी के कुछ वर्षों बाद नरेंद्र मोदी ने घर छोड़ दिया और एक तरह से उनका वैवाहिक जीवन लगभग समाप्त हो गया |


Narendra Modi का मानना है कि एक शादीशुदा के मुकाबले अविवाहित व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ ज्यादा जोरदार तरीके से लड़ सकता है क्योंकि उसे अपनी पत्नी परिवार और बाल बच्चों की कोई चिंता नहीं रहती बचपन से ही मोदी में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी 1962 में जब भारत चीन युद्ध हुआ था उस समय मोदी Railway Staion पर जवानों से भरी ट्रेनों में उनके लिए खाना और चाय लेकर जाते थे 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय भी मोदी ने जवानों की खूब सेवा की थी |





1971 में RSS के प्रचारक बन गए और अपना पूरा समय RSS को देने लगे वह वहां सुबह 5:00 बजे उठ जाते और देर रात तक काम करते प्रचारक होने की वजह से मोदी जी ने गुजरात की अलग-अलग जगहों पर जाकर लोगों की समस्याओं को बहुत करीब से समझा और फिर भारतीय जनता पार्टी का आधार मजबूत करने में इंपॉर्टेंट रोल निभाया 1975 के आसपास में राजनीति क्षेत्रों में विवाद की वजह से उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कई राज्यों में आपातकालीन घोषित कर दिया था और तब RSS जैसी संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था फिर भी मोदी चोरी-छिपे देश की सेवा करते रहें और सरकार की गलत नीतियों का जमकर विरोध किया



उसी समय मोदी जी ने एक किताब भी लिखी थी जिसका नाम संघर्ष मा गुजरात था इस किताब में उन्होंने गुजरात के राजनीति के बारे में चर्चा किया था


उन्होंने RSS के प्रचारक रहते हुए 1980 में गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पीजी की Degree प्राप्त की आदत में बेहतरीन काम को देखते हुए भाजपा में नियुक्त किया गया जहां उन्होंने 1990 में आडवाणी की अयोध्या रथ यात्रा का भव्य आयोजन किया जिससे भाजपा के सीनियर लीडर काफी प्रभावित हुए आगे भी उनके अद्भुत कार्य की बदौलत भाजपा में उनका महत्व बढ़ता रहा था | 




आखिरकार मोदी की मेहनत रंग लाई और उनकी पार्टी ने गुजरात में 1995 के विधानसभा चुनाव में बहुमत में अपनी सरकार बना ली | 



लेकिन मोदी से कहासुनी होने के बाद शंकर सिंह बघेला ने पार्टी से रिजाइन दे दिया उसके बाद केशुभाई पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया गया और नरेंद्र मोदी को दिल्ली बुलाकर भाजपा में संगठन के लिए केंद्रीय मंत्री का रिस्पांसिबिलिटी दिया गया मोदी जी ने इस रिस्पांसिबिलिटी को भी बखूबी निभाया 2001 में केशुभाई पटेल की सेहत बिगड़ने लगी थी और भाजपा चुनाव में कई सीटें भी हार रही थी | इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने अक्टूबर 2001 में किस भाई पटेल की जगह नरेंद्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री का अपना पहला कार्यकाल 7 अक्टूबर 2001 से शुरू किया इसके बाद मोदी ने राजकोट विधानसभा चुनाव लड़ा जिसमें उन्होंने कांग्रेस पार्टी की अश्विन मेहता को बड़े अंतर से मात दी | 



मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए मोदी ने बहुत ही अच्छी तरीके से अपने कार्यों को संभाला और गुजरात को फिर से मजबूत कर दिया | 



उन्होंने गांव गांव तक बिजली पहुंचाई Tourism  को बढ़ावा दिया देश में पहली बार किसी राज्य की सभी नदियों को एक साथ जोड़ा गया जिससे पूरे राज्य में पानी की problem solve  हो गई | एशिया के सबसे बड़े सोलर पार्क का निर्माण भी गुजरात में हुआ और इन सबके अलावा भी उन्होंने बहुत सारे अद्भुत कार्य की और देखते ही देखते गुजरात को भारत का सबसे बेहतरीन राज्य बना दिया और वह खुद गुजरात के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री बन गए लेकिन उसी बीच मार्च 2002 में गुजरात के गोधरा कांड से नरेंद्र मोदी का नाम जोड़ा गया इस कांड के लिए Newyork Timesने मोदी प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया और फिर कांग्रेसी सहित अनेक विपक्षी दलों ने उनके इस्तीफे की मांग की दोस्तों गोधरा कांड में 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा नाम शहर में रेलवे स्टेशन पर साबरमती ट्रेन के एसी कोच में आग लगाए जाने के बाद 59 लोगों की मौत हो गई थी जिसके बाद पूरे गुजरात में सांप्रदायिक दंगे होना शुरू हो गए और फिर 28 फरवरी 2002 को गुजरात के कई इलाकों में दंगा बहुत ज्यादा भड़क गया जिसमें 12 सौ से अधिक लोग मारे गए इसके बाद इस घटना की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय ने विशेष जांच दल बनाई और फिर दिसंबर 2010 में जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया कि इन दंगों में नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला




Narendra Modi ने गुजरात में कई ऐसे हिंदू मंदिरों को भी ध्वस्त कराने में थोड़ा सा भी नहीं सोचा जो सरकारी कानून कायदों के मुताबिक नहीं बने थे | हालांकि इसके लिए उन्हें विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों का भी विरोध झेलना पड़ा लेकिन उन्होंने इसकी थोड़ी सी भी परवाह नहीं की और देश के लिए जो सही था उसी काम को करते रहे उनकी अच्छी डिसीजन और कार्यों की वजह से गुजरात के लोगों ने मोदी को 4 बार लगातार अपना मुख्यमंत्री बनाया गुजरात में मोदी की सफलता देखकर बीजेपी के सीनियर नेताओं ने मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव का प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया जिसके बाद मोदी ने पूरे भारत में बहुत सारी रैलियां की और साथ ही साथ उन्होंने Social Media का भी भरपूर लाभ उठाया और लाखों लोगों तक अपनी बात रखी मोदी के अद्भुत विकासशील कार्य उनकी प्रेरणादायक भाषण देश के लिए उनका प्यार और उनकी सकारात्मक सोच की वजह से उन्हें भारी मात्रा में वोट मिले और वे भारत के प्रधानमंत्री बने | 


नरेंद्र मोदी एक बहुत ही मेहनती व्यक्ति हैं वह 18 घंटे काम करते हैं और कुछ ही घंटे सोते हैं दोस्तों मोदी जी का कहना है कि कड़ी मेहनत कभी थकान नहीं लाती है वह तो बस संतोष लाती है नरेंद्र मोदी शुद्ध शाकाहारी हैं और नवरात्र के 9 दिन उपवास रखते हैं वे अपनी सेहत का भरपूर ध्यान रखते हैं और प्रतिदिन योग करते हैं भले ही वे कहीं पर भी हैं मोदी जी अपनी मां से बहुत प्यार करते हैं उनका कहना है कि मेरे पास अपनी बाबा दादा की ना ही एक पाई है और ना ही मुझे चाहिए मेरे पास अगर कुछ है तो अपनी मां का दिया हुआ आशीर्वाद है | 


शनिवार, 20 जून 2020

आखिर क्यों दुनिया में हर 100 साल के अंतराल में आती है महामारी?

आखिर क्यों दुनिया में हर 100 साल के अंतराल में आती है महामारी क्यों 20 के आंकड़े का साल दुनिया के लिए महामारी का कारण बनता है दोस्तों आज पूरी दुनिया को रुला देने और कहर मचा देने वाले कोरोना का पूरी दुनिया के साइंटिस्ट रात दिन कोरोनावायरस का इलाज खोजने में लगे हुए हैं मगर फिर भी सफलता नहीं प्राप्त कर पाए आज हम इतने एडवांस टेक्नोलॉजी के साए में होते हुए भी कोरोनावायरस का इलाज नहीं खोज पाए तो जरा सोचो आज से सैकड़ों साल पहले किसी वायरस की महामारी का इलाज कैसे होता होगा आप दुनिया का इतिहास उठाकर देख लीजिए आपको बहुत सी ऐसी घटना मिलेगी जिस वजह से करोड़ों लोग मौत के मुंह में चले गए थे लेकिन अब हम आपको जो जानकारी बताने जा रहे हैं उससे आप एक संयोग मात्र ही कह सकते हैं क्योंकि हर 100 साल पर लोट कर आती है एक महामारी | 


जिस तरह आज पूरी दुनिया को रोना की चपेट में आई है हर 100 साल में इंसानों को एक नई महामारी की दवा खोजनी पड़ती है ऐसा एक बार नहीं बल्कि पिछले 400 सालों से होता रहा है लगातार 400 सालों से महामारी पूरी दुनिया में अपना कहर मचाती है हालांकि इसमें एक बात कॉमन रही है वह हर सदी में 20 का आंकड़ा जैसे इस बार 2020 का आंकड़ा वैसे ही 1720 1820 और 1920 में महामारी हो चुकी हैं आइए जानते हैं इन 400 सालों में किस-किस महामारी हो ने कितने लोगों को मौत के घाट उतारा है और दोस्तों मैं हूं आपका दोस्त राहुल सिंह चौहान आप पढ़ रहे हैं  Pageofhistroy दोस्तों साल 1720 में से एक का अटैक सबसे पहले शुरुआत करते हैं दुनिया में फैली सबसे पहली महामारी के



Plague -प्लेग

साल 1720 जब पूरी दुनिया में प्लेग Plague फैल गया था इसे  ग्रेट प्लेगऑफ मर्शिले कहा जाता है मर्शिले फ्रांस का एक शहर है उस वक्त दुनिया में इतनी ज्यादा जनसंख्या नहीं थी फिर भी आप इस बात को जानकार अंदाजा लगा सकते हैं कि  मर्शिले में पहली फ्लाइट की वजह से 100000 लोगों की मौत हुई थी प्लेग फैलते ही कुछ महीनों में 50000 लोग मारे गए बाकी 50000 लोग अगले 2 सालों में मर गए उस वक्त लाशों का कोहराम मच गया था| साल 1807 में यह महामारी चाइना के अंदरूनी इलाकों में अपना पैर पसार चुकी थी चाइना से ही यह बीमारी भारत में पहुंची भारत में इस बीमारी की शुरुआत 1890  में हुई इसमें चाइना से ज्यादा कोहराम भारत में मचाय भारत में इस महामारी ने बड़ी संख्या में लोगों को चपेट में ले लिया फोटो में दिख रहा है कलाकार मिशेल शेर की बनाई हुई पेंटिंग इसमें उन्होंने दिखाने कोशिश की कि कैसे प्लेग ने कितने लोगों को मार डाला था 



Plague




Cholera-1820 में कोलेरा की महामारी 1720 ईस्वी के ठीक 100 साल बाद 1820 में कोलेरा नाम की महामारी ने दुनिया में अपना कोहराम मचाया था| 1820 में कोलारा ने एशियाई देशों में महामारी का रूप लिया इस महामारी में जापान खाड़ी के देश भारत,बैंकॉक,जावा,भूटान,चाइना,मॉरीशस,सीरिया इन सभी देशों को अपनी जकड़ में ले लिया कोलेरा की वजह से जावा में 100000 लोगों की मौत हुई थी |  सबसे ज्यादा मौतें थाईलैंड,फिलिपीन,इंडोनेशिया में हुई थी इस महामारी ने बड़ी संख्या में लोगों की ज़िंदगी को छीन लिया था | 



Cholera





Spanish Flu -1920 में स्पेनिश फ्लू का हमला कोलेरा  बीमारी के ठीक 100 साल बाद एक नई बीमारी स्पेनिश फ्लू का कहर बरसा वैसे यह पहला तो 1918 से ही था लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर  1920 में देखने को मिला जब प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हुई थी | तब स्पेनिश फ्लू ने भी अपना असर दिखाना चालू कर दिया प्रथम विश्व युद्ध में जितने लोग मारे गए उसकी दोगुना लोगों को स्पेनिश फ्लू ने अपने चपेट में ले लिया था | कहा जाता है कि फ्लू की वजह से पूरी दुनिया में 5 करोड लोग मारे गए थे | इस संक्रमण ने भारत में दो करोड़ की गरीब लोगों की जान ले ली थी | इनमें से पंजाब जो कि आज के पंजाब हरियाणा हिमाचल प्रदेश और पाकिस्तान पंजाब को मिलाकर 800000 लोगों की मौत हो गई थी | यह मानव इतिहास की सबसे भीषण महामारीओं में से एक मानी जाती है 




Spanish Flu





अब आई साल 2020 की कोरोना वायरस की महामारी 

लोग कोरोना COVID-19 का नाम सुनकर ही सहम जाते है है | चाइना के वुहान शहर से शुरू हुई ये बीमारी आज पूरी दुनिया में फैल चुकी है | आज इस महामारी से लाखों लोग संक्रमित हो चुके हैं और हजाCCरों लोग इसमें मारे जा चुके हैं | और अब Covid-19 कोरोना बीमारी लोगों को अपना शिकार बनाती जा रही है |  वैज्ञानिक दिन-रात इसका टीका बनाने में लगे हुए हैं मगर आज तक सफलता हाथ नहीं लगी आज पूरी दुनिया में घरों में कैद है घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है | इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब पूरी दुनिया के लोग घरों में कैद है | दोस्तों यह महामारी हर 20 साल से ही क्यों हुई है इनका इसी साल में असर क्यों होता है इन बातों को वैज्ञानिक किसी भी तरीके से साबित नहीं कर पाए लेकिन महामारियों  के मामले में यह 20 के आंकड़े का साल एक रहस्यमई साल माना जाता है अब इसके बारे में आपकी क्या राय है अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में जरुर दें | 




COVID-19



गुरुवार, 18 जून 2020

Secrets Of Shangri-la Ghati In Hindi - शंगरी ला घाटी का रहस्य

हैलो दोस्तो तो आज हम Page of History मे आपके लिए लाए ऐसी पोस्ट जो पढ़ कर आपको अच्छा लगेगा यह बहुत रोचक पोस्ट है।क्या आपने कभी शंगरी ला घाटी - Shangri La Ghati  नाम  सुना है | शंग्रीला घाटी भारत और चीन सीमा पर स्थित है शंग्रीला घाटी अपने अंदर बहुत रहस्य दबाए है | जिसका आज तक कोई पता नही लगा पाया| तो चलते है हम और यह जानते है इसका रहस्य और रोचक रोचक बाते| 



शंगरी ला घाटी - Shangri La Ghati

शंगरी ला घाटी  बरमूडा ट्रायंगल की तरह बदनाम है कहा जाता है कि यहाँ जाने वाले सभी लोग गायब हो जाते है शंगरी ला घाटी तांत्रिक साधनाओ और साधना करने वाले लोगो  के रहने का केंद्र माना जाता है| जेम्स  हिल्टन ने भी इस घाटी का जिक्र अपनी पुस्तक होराइज़न मे किया हुआ है| और भी बहुत से लोगो ने इस घाटी का ज़िक्र अपनी किताबो मे किया है| शंगरी ला घाटी तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश  बिच स्तिथ है तंत्र - मंत्र की पुस्तकों मे खास शंगरी ला घाटी का उल्लेख मिलता है | डॉ गोपीनाथ ने भी अपनी किताब मैं इसका जिक्र किया है| जो की पद्मभूषण से नवाजे गए थे| उन के अनुसार घाटी बरमूडा की जैसे ही रहस्यमई है|उनका मानना था की इसका सम्बन्ध दूसरे लोक से है| 


Pageofhistory Shangri La Ghati


 यही नहीं सुप्रसिद्ध तंत्र साहित्य लेखक  अरुण कुमार शर्मा ने अपनी पुस्तक मे इसका  विवरण दिया है जिसका नाम तिब्बत की वह रहस्यमय घाटी है | यदि आपको इसके इसके बारे मे और गहन जानना है तो आपको प्राचीन किताब जिसका नाम काल विज्ञानं है वो पढ़नी पड़ेगी | और किताब आपको तिब्बत के तिवांठ मठ के पुस्तकालय मे मिलेगी | किताब तिब्बत की भाषा  मे लिखी गई है | इन किताबो के अनुसार यह पता चलता है कि यहाँ तीन  आयामों के अलावा चौथा आयाम काम  करता है | जहा कोई भी वस्तु या व्यक्ति  पहुंचते ही वह अदृश्य हो जाती है | इसे पृथ्वी का आध्यात्मिक केंद्र भी माना जाता है |  



Pageofhistory Shangri La Ghati



कहा जाता है कि शंग्रिला घाटी को आम आदमी अपनी नज़रों से नहीं देख सकता है। युत्सुंग ने बताया है कि वह ना तो सूर्य का प्रकाश पहुंचता है और ना ही वहा चांद की रोशनी पहुंचती है। उनके अनुसार वहा तीन साधना केंद्र है।

1.ज्ञानगंज मठ
2.सिद्ध विज्ञान आश्रम
3.योग सिद्धाश्रम



Pageofhistory Shangri La Ghati



इन साधना केंद्रों पर अनेक योगी मिल जाएंगे।ये योगी पुराने काल से है यहां साधना के लिए आते है। शंग्रीला घाटी को सिद्धाश्रम भी कहा जाता है।इसका वर्णन वेदों मे, रामायण, महाभारत सभी में मिलता है। यहां लोग सैकड़ों वर्षों तक जीवित रहते है।कई लोगो ने शग्रीला घाटी का पता लगाने की कोशिश की परंतु कोई लोट कर नहीं आया सब गायब हो गए।


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सोमवार, 15 जून 2020

History Of Amer Fort In Hindi - आमेर किले का इतिहास

हेलो दोस्तों तो आज हम बात करेंगे राजस्थान के सुप्रसिद्ध पर्यटक स्थल आमेर की जो की जयपुर शहर में स्थित है| आपने बहुत सी फिल्मो में आमेर का किला तो देखा ही होगा और जो जयपुर के है या कभी आए है वह भी बिना देखे नहीं गए होंगे| आमेर के किले को देखने के बाद लोगो के मन मैं बहुत से सवाल उठते है जिसका जवाब आज हमारी पोस्ट मैं मिल जाएगा| 




Amer fort





History of Amer Fort - आमेर किले का इतिहास 

आमेर का नाम भगवान शिव के नाम अंबिकेश्चर के नाम पर रखा गया है कुछ लोगो का कहना है कि नव दुर्गा के रूप अंबा माता के नाम से आमेर का नाम लिया गया है। राजा मानसिंह द्वारा 1592 ई में आमेर का निर्माण करवाया गया। इस पहले 11 वी शताब्दी में कछवाहो का शासन रहा था। आमेर में शीला देवी का एक मंदिर भी है। आमेर का किला बहुत कलात्मकता और रचनात्मक ढंग से बना हुआ है।आमेर के किले में पानी स्त्रोत बहुत ध्यान में रखकर बनाया गया है।यह बनाए गए पानी से स्त्रोत से यहां बने तालाब बारिश के दिनों में भर जाते है और यह पानी पूरे वर्ष की पूर्ति के काफी होता है। आमेर का किला लाल पत्थर और संगमरमर से बनाया गया इसमें राजपूती शेली का प्रयोग किया गया है।आमेर किले के मुख्य द्वार को सुराजपोल कहा जाता है। यह किला इस तरह बना हुआ है कि यहां ऊपर प्रकाश और हवा की कमी महसूस नहीं होती है गर्मी में भी यह ठंडक रहती है और प्रकाश आता रहता है।सूरजपोल से अंदर जाते ही आप जलेब चोक में पहुंच जाते है। जो कि सेना के युद्ध के अभ्यास के उपयोग में लिया जाता था। आपने फिल्मों में बहुत बार देखा होगा ये तो।


Amer Fort

Amer Fort




दीवान - ए - आम - Dewan-A-Aam

दीवान ए आम का प्रयोग जनसाधारण दरबार के लिए जाता था।दीवान - ए - आम में 27 स्तंभों वाला एक हॉल है।इसके स्तंभों पर हस्थ रूपी कलाएं बनी हुई है।यहां जनसाधारण लोगो की समस्याएं और याचिकाएं और उनका निवारण किया जाता था।


Amer Fort



शिला देवी मंदिर - Shila Devi Mandir

जलेबी चोक के दाई और एक मंदिर है जिसे शिला देवी के नाम से जाना जाता है।ये मंदिर कछवाह राजपूती की कुलदेवी मानी जाती है। शिला देवी माता नव दुर्गा का ही रूप हैं।इस मंदिर में मुख्य द्वार पर चांदी के पत्रे से मधे हुए द्वार कि जोड़ी है। इस पर नव दुर्गा के चित्र और दस महाविद्यएं लिखी हुई है। और अंदर चांदी से बं हुए दो शेरो के बीच में माता की मूर्ति स्थापित है। 



Amer Fort




शीशमहल - Shish Mehal

शीशमहल को जय मंदिर भी कहा जाता है। यह महल पूरा दर्पण से बना हुआ है।इसमें बहुत रंग के शीशे उपयोग में लिए गए है।इसके अंदर बहुत है सुंदर मीनाकारी और चित्रकारी की गई है। पर्यटकों के लिए यह बहुत आकर्षक का केंद्र रहता है।यह इस तरीके से बना हुआ है कि यह एक मोमबत्ती जला कर की यह रोशनी की जा सकती है।


Amer Fort


जादुई पुष्प - Jadui Pushp

शीशमहल के स्तंभों पर नक्काशी किए गए चिजो में जादुई पुष्प आकर्षण का केंद्र रहता है।ये पुरष बहुत है अदभुत कला को प्रदर्शित करता है।इस पुष्प में सात विशिष्ट और अनोखी डिजाइन है जो इसे आकर्षण का केंद्र बनाती है। इसमें मछली की पूछ,हाथी की सूंड,नाग का फन,कमल,भुट्टा,बिच्छू, सिंह की पूछ आदि का रूपांकन किया गया है।इनमें से किसी एक को ढकने पर दूसरी वस्तु प्राप्त होती है।


Amer Fort

Amer Fort





शुक्रवार, 12 जून 2020

Facts Of Ramayan - रावण किसका अवतार था?

हैलो दोस्तो तो आज pageofhistory में आपके लिए के इस प्रश्न का गहरा अध्ययन कर आपके लिए यह जानकारी लाए है।रावण बहुत है विद्वान था रावण को शास्त्रों के का बहुत अच्छे ज्ञान था साथ ही उसे शास्त्रों,जादू और तांत्रिक विद्या में भी महारथ हासिल थी। बहुत कम लोग जानते होंगे या उन्होने ये सोचा भी नहीं होगा कि रावण जो इतना ज्ञानी था शक्तिशाली था वो आखिर है किसका अवतार?तो हम बताते है पूरे विस्तार से आपको की रावण किसका रूप है।
Ramayan


Ramayan


विष्णुपुराण के अनुसार रावण विष्णु भगवान का द्वारपाल था।एक श्राप के कारण रावण को असुर बनना पड़ा और वो भी एक बार नहीं तीन बार राक्षस योनि में जन्म लिया है रावण ने।

एक बार की बात है सनत,सनातन और सनक सनंदन कुमार चार ऋषिगण विष्णु जी से मिलने पहुंचे तो उन्हें विष्णु जी के दो द्वारपालक
जय और विजय जी पहरा दे रहे थे उन्होंने उन ऋषिगणों को अंदर जाने से रोक लिया और उन्हें अंदर नहीं जाने दिया।ऋषिगणों के बहुत निवेदन करने पर भी उन्होंने उन्हे अंदर नहीं जाने दिया तो ऋषिगणों ने उन्हे राक्षस बनने का श्राप दे दिया यह सुनकर वह दोनों बहुत घबरा गर और चिंतित हो उठे उन्होंने ऋषिगणों से श्रमा मांगी पर वह नहीं माने उन दोनों ने विष्णु जी को ये समस्या बताई विष्णु जी ने ऋषिगणों को श्राप वापस लेने को बोला परन्तु ऋषिगण बोले कि अब वह कुछ नहीं कर सकते परन्तु इसका एक उपाय है इन दोनों को तीन जन्मों तक राक्षस योनि जन्म लेना पड़ेगा और इनकी मृत्यु भगवान विष्णु के हाथो ही हो तभी इनका उद्धार संभव है ये इनके पुराने रूप में लोट आएंगे।

Ramayan


वह तीन जन्म कोन - कोन से रावण के?

पहले जन्म में तो ये दोनों द्वारपाल हिरण्याक्ष और हिरण्यकस्यपू के रूप में जन्म लिया उन दोनों का मृत्यु का कारण विष्णु भगवान है बने और दूसरे जन्म में रावण और कुंभकरण के रूप में जन्म लिया तब इनकी मृत्यु का कारण भी विष्णु भगवान बने जिन्होंने श्री राम के रूप में जन्म लिया और इन दोनों की मृत्यु का कारण बने। तीसरे जन्म में ये शिशुपाल और दंतव्रक के रूप में जन्म लिया जिसका उद्धार करने के लिए भगवान विष्णु को कृष्ण के रूप में जन्म लेना पड़ और इनका उद्धार किया।

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गुरुवार, 11 जून 2020

Facts Of Mahabharat-क्यों पांडवो को नरक जाना पड़ा और दुर्योधन को स्वर्ग?

हैलो दोस्तो तो आज हम इस विषय पर बात करेंगे कि आखिर क्यों पांडवो को नरक जाना पड़ा और दुर्योधन को स्वर्ग?  ऐसा क्या पाप हुआ था पांडवो से जो उनको नरक का द्वार देखना पड़ा।तो दोस्तो आज हम आपको pageofhistory में आपको इसके बारे गहरा अध्यन कर के बाद बताने जा रहे है।


ये तो हम सभी जानते है महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चलता रहा था। युद्ध के अन्तर्गत क्या - क्या घटित हुआ ये सभी जानते है क्यों की महाभारत सभी ने देखी हुई है परन्तु यह बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि पांडवो को नरक क्यों भेजा और दुर्योधन को स्वर्ग क्यों।



Mahabharat



पांडवो ने युद्ध खत्म करने के पश्चात 36 वर्षो तक राज किया उसके पश्चात राज काज अपने उतराधिकारी परीक्षित को सौप कर स्वर्ग की और निकल पड़े। उनके साथ एक कुत्ता भी था जो कि स्वम यमराज थे । स्वर्ग तक पहुंचते - पहुंचते द्रोपती और भूम,अर्जुन,नकुल सहित सहदेव ने बीच रास्ते में है अपने प्राण त्याग दिए थे युधिष्ठिर सशरीर स्वर्ग पहुंचे और वह जैसे है अंदर पहुंचे तो सर्वप्रथम उनकी नजर दुर्योधन पर गई वहा उनको देख कर वह चोक गए फिर वहां इंद्र भगवान को खड़ा पाकर उन्होन उनको प्रणाम किया और इंद्र भगवान से पूछा कि मेरे भाई और मेरी पत्नी कहा है इन्द्र भगवान ने कहा वह सब नरक में है युधिष्ठिर यह सुनकर बहुत दुखी हुए उन्होन इंद्र भगवान से नरक में जाने की इच्छा जताई भगवान इंद्र ने अपने द्वारपाल को उनको वहा छोड़ आने का आदेश दिया।

Mahabharat


द्वारपाल उन्हें नरक लोक ले गए। नरक के रास्तों पर बहुत अंधेरा था और बहुत है तेज दुर्गंध आ रही थी थोड़ा और आगे चलने पर युधिष्ठिर ने देखा कि बड़ी- बड़ी कढ़ाई में लोगो को तला जा रहा है किसी को जंजीरों से बांध कर आग में फेक दिया गया है कई लोगो को बहुत सारे कोवो के बीच में रखा गया था कोवों की चोच लोहे की थी जिससे वो उनको कष्ट पहुंचा रहे थे जगह- जगह से चीखने चिल्लाने की आवाजे आ रही थी। यह सब युधिष्ठर से देखा नहीं गया और उन्होंने द्वारपाल को वापस चलने को कहा तभी कुछ लोगो को जंजीरों से बांध कर लाया जा रहा था युधिष्ठिर के पूछने पर उन्होंने बताया वो उनके भाई और द्रोपती थे उन्होंने द्वारपाल को कहा मैं अपने भाइयों को नहीं छोड़ सकता तुम लोट जाओ। उनके ऐसा बोलते है सभी देवता वहा आए उनके आते ही सभी और सुगंध फेल गई और रोशनी हो गई तब युधिष्ठिर ने देवराज इंद्र से पूछा कि हे भगवान्  दुर्योधन को इतने पाप करने के बाद भी स्वर्ग में और हमे नरक में ऐसा अन्याय क्यों?तब देवराज बोले कि दुर्योधन ने इतने पाप किए हो परन्तु उसने अपने क्षत्रिय धर्म का पालन किया है वह अपने दृढ़ निश्चय पर अटल था उसकी परवरिश गलत थी परन्तु वह फैसले पर सदेव अटल रहा इसी कारण उसे पहले स्वर्ग का भोग करने की प्राथमिकता है। और तुम ने अपने गुरु द्रोाचार्य को छल से मारा यह तुम्हारा सबसे बड़ा पाप था इसी कारण तुम्हे पहेल नरक भोगना पड़ेगा उसके पश्चात स्वर्ग की प्राप्ति होगी।

मंगलवार, 9 जून 2020

History Of Bhangarh - भूतो के भानगढ़ का क्या है रहस्य?

हेलो दोस्तों कैसे है आप लोग तो आज हम बात करेंगे भानगढ़ के किले की जो की एक Haunted Place के रूप मैं जाना जाता है।  आखिर उस किले मै ऐसा क्या है जिससे की वो किला रहस्यमयी और डरावना माना जाता है। यहा लोग जाने से भी डरते है ऐसा क्या इस किले में क्यों डरते है लोग।

Haunted Places



किले का इतिहास क्या है?


 भानगढ़ एक प्राचीन स्थान है जो कि 16 वीं सदी के अंत में 1573 में राजा भगवंत दास के द्वारा निर्मित कराया गया था यह किला 300 सालो तक आबाद रहा भानगढ़ माधो सिंह की राजधानी रहा।जो कि राजा मानसिंह के भाई थे और अकबर के दीवान थे। राजा मानसिंह अकबर के बहुत खास थे।भानगढ़ में किला,मंदिर,बाज़ार,हवेली,गोपीनाथ मंदिर,सोमेश्वर मंदिर,मंगलादेवी और केसवराई मंदिर यहां स्थित है। इस किले को सप्तमहल भी कहा जाता था परन्तु अब यह 4 है महल बचे है







क्यों कहते है इसे भूतो का भानगढ़ - क्या है इसके पीछे का रहस्य?


कहा जाता कि भानगढ़ में एक राजकुमारी थी वो बहुत सुंदर थी वह इतनी सुन्दर थी कि उनकी सुंदरता की बाते दूर - दूर तक होती थी।उनके राज्य में रहने वाला तांत्रिक जिसका नाम सिंधु सेवड़ा था वो राजकुमारी को सुंदरता पर मोहित हो गया था। वह प्रतिदिन राजकुमारी को देखने के लिए उनके बाज़ार जाने के समय पर उनके पीछे जाता था और उनको देखता था परन्तु राजकुमारी ने कभी उसको मूड कर भी नहीं देखा। राजकुमारी को इत्र बहुत पसंद था तांत्रिक ने देखा कि राजकुमारी इत्र को बहुत पसंद करती है तो क्यू ना जादू कर के राजकुमारी को हासिल कर लिया जाए।
Haunted Places

 तांत्रिक काले जादू में महारथी था। उसने इत्र में वशीकरण का जादू कर के राजकुमारी के पास भिजवा दिया पर इस चीज की भनक राजकुमारी को लग चुकी थी राजकुमारी ने इत्र की शीशी गुस्से में आकर फेक दी इत्र की शीशी पत्थर पर टकराकर फुट गई तो उसका कला जादू इस पत्थर पर हो गया और वह पत्थर है उसकी मौत का कारण बना परन्तु उसने मरने से पहले उसने एक श्राप दिया कि यह जीवित सभी लोग जल्द है मर जाएंगे और उनकी आत्मा यही इसी महल में भटकती रहेगी और उसका श्राप सच हुआ कहा जाता है जल्दी है सब कुछ खत्म हो गया और उन सब की आत्मा आज भी भानगढ़ में भटकती है। कहा जाता है यहां लगने वाला बाज़ार भी प्रतिदिन रात्रि में लगता है इसलिए यहां किसी को भी 5 बजे बाद रुकने नहीं देते है।

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