हेलो दोस्तों तो आज हम बात करेंगे राजस्थान के सुप्रसिद्ध पर्यटक स्थल आमेर की जो की जयपुर शहर में स्थित है| आपने बहुत सी फिल्मो में आमेर का किला तो देखा ही होगा और जो जयपुर के है या कभी आए है वह भी बिना देखे नहीं गए होंगे| आमेर के किले को देखने के बाद लोगो के मन मैं बहुत से सवाल उठते है जिसका जवाब आज हमारी पोस्ट मैं मिल जाएगा|
आमेर का नाम भगवान शिव के नाम अंबिकेश्चर के नाम पर रखा गया है कुछ लोगो का कहना है कि नव दुर्गा के रूप अंबा माता के नाम से आमेर का नाम लिया गया है। राजा मानसिंह द्वारा 1592 ई में आमेर का निर्माण करवाया गया। इस पहले 11 वी शताब्दी में कछवाहो का शासन रहा था। आमेर में शीला देवी का एक मंदिर भी है। आमेर का किला बहुत कलात्मकता और रचनात्मक ढंग से बना हुआ है।आमेर के किले में पानी स्त्रोत बहुत ध्यान में रखकर बनाया गया है।यह बनाए गए पानी से स्त्रोत से यहां बने तालाब बारिश के दिनों में भर जाते है और यह पानी पूरे वर्ष की पूर्ति के काफी होता है। आमेर का किला लाल पत्थर और संगमरमर से बनाया गया इसमें राजपूती शेली का प्रयोग किया गया है।आमेर किले के मुख्य द्वार को सुराजपोल कहा जाता है। यह किला इस तरह बना हुआ है कि यहां ऊपर प्रकाश और हवा की कमी महसूस नहीं होती है गर्मी में भी यह ठंडक रहती है और प्रकाश आता रहता है।सूरजपोल से अंदर जाते ही आप जलेब चोक में पहुंच जाते है। जो कि सेना के युद्ध के अभ्यास के उपयोग में लिया जाता था। आपने फिल्मों में बहुत बार देखा होगा ये तो।
दीवान - ए - आम - Dewan-A-Aam
दीवान ए आम का प्रयोग जनसाधारण दरबार के लिए जाता था।दीवान - ए - आम में 27 स्तंभों वाला एक हॉल है।इसके स्तंभों पर हस्थ रूपी कलाएं बनी हुई है।यहां जनसाधारण लोगो की समस्याएं और याचिकाएं और उनका निवारण किया जाता था।
शिला देवी मंदिर - Shila Devi Mandir
जलेबी चोक के दाई और एक मंदिर है जिसे शिला देवी के नाम से जाना जाता है।ये मंदिर कछवाह राजपूती की कुलदेवी मानी जाती है। शिला देवी माता नव दुर्गा का ही रूप हैं।इस मंदिर में मुख्य द्वार पर चांदी के पत्रे से मधे हुए द्वार कि जोड़ी है। इस पर नव दुर्गा के चित्र और दस महाविद्यएं लिखी हुई है। और अंदर चांदी से बं हुए दो शेरो के बीच में माता की मूर्ति स्थापित है।
शीशमहल - Shish Mehal
शीशमहल को जय मंदिर भी कहा जाता है। यह महल पूरा दर्पण से बना हुआ है।इसमें बहुत रंग के शीशे उपयोग में लिए गए है।इसके अंदर बहुत है सुंदर मीनाकारी और चित्रकारी की गई है। पर्यटकों के लिए यह बहुत आकर्षक का केंद्र रहता है।यह इस तरीके से बना हुआ है कि यह एक मोमबत्ती जला कर की यह रोशनी की जा सकती है।
जादुई पुष्प - Jadui Pushp
शीशमहल के स्तंभों पर नक्काशी किए गए चिजो में जादुई पुष्प आकर्षण का केंद्र रहता है।ये पुरष बहुत है अदभुत कला को प्रदर्शित करता है।इस पुष्प में सात विशिष्ट और अनोखी डिजाइन है जो इसे आकर्षण का केंद्र बनाती है। इसमें मछली की पूछ,हाथी की सूंड,नाग का फन,कमल,भुट्टा,बिच्छू, सिंह की पूछ आदि का रूपांकन किया गया है।इनमें से किसी एक को ढकने पर दूसरी वस्तु प्राप्त होती है।








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