ये तो हम सभी जानते है महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चलता रहा था। युद्ध के अन्तर्गत क्या - क्या घटित हुआ ये सभी जानते है क्यों की महाभारत सभी ने देखी हुई है परन्तु यह बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि पांडवो को नरक क्यों भेजा और दुर्योधन को स्वर्ग क्यों।
पांडवो ने युद्ध खत्म करने के पश्चात 36 वर्षो तक राज किया उसके पश्चात राज काज अपने उतराधिकारी परीक्षित को सौप कर स्वर्ग की और निकल पड़े। उनके साथ एक कुत्ता भी था जो कि स्वम यमराज थे । स्वर्ग तक पहुंचते - पहुंचते द्रोपती और भूम,अर्जुन,नकुल सहित सहदेव ने बीच रास्ते में है अपने प्राण त्याग दिए थे युधिष्ठिर सशरीर स्वर्ग पहुंचे और वह जैसे है अंदर पहुंचे तो सर्वप्रथम उनकी नजर दुर्योधन पर गई वहा उनको देख कर वह चोक गए फिर वहां इंद्र भगवान को खड़ा पाकर उन्होन उनको प्रणाम किया और इंद्र भगवान से पूछा कि मेरे भाई और मेरी पत्नी कहा है इन्द्र भगवान ने कहा वह सब नरक में है युधिष्ठिर यह सुनकर बहुत दुखी हुए उन्होन इंद्र भगवान से नरक में जाने की इच्छा जताई भगवान इंद्र ने अपने द्वारपाल को उनको वहा छोड़ आने का आदेश दिया।
द्वारपाल उन्हें नरक लोक ले गए। नरक के रास्तों पर बहुत अंधेरा था और बहुत है तेज दुर्गंध आ रही थी थोड़ा और आगे चलने पर युधिष्ठिर ने देखा कि बड़ी- बड़ी कढ़ाई में लोगो को तला जा रहा है किसी को जंजीरों से बांध कर आग में फेक दिया गया है कई लोगो को बहुत सारे कोवो के बीच में रखा गया था कोवों की चोच लोहे की थी जिससे वो उनको कष्ट पहुंचा रहे थे जगह- जगह से चीखने चिल्लाने की आवाजे आ रही थी। यह सब युधिष्ठर से देखा नहीं गया और उन्होंने द्वारपाल को वापस चलने को कहा तभी कुछ लोगो को जंजीरों से बांध कर लाया जा रहा था युधिष्ठिर के पूछने पर उन्होंने बताया वो उनके भाई और द्रोपती थे उन्होंने द्वारपाल को कहा मैं अपने भाइयों को नहीं छोड़ सकता तुम लोट जाओ। उनके ऐसा बोलते है सभी देवता वहा आए उनके आते ही सभी और सुगंध फेल गई और रोशनी हो गई तब युधिष्ठिर ने देवराज इंद्र से पूछा कि हे भगवान् दुर्योधन को इतने पाप करने के बाद भी स्वर्ग में और हमे नरक में ऐसा अन्याय क्यों?तब देवराज बोले कि दुर्योधन ने इतने पाप किए हो परन्तु उसने अपने क्षत्रिय धर्म का पालन किया है वह अपने दृढ़ निश्चय पर अटल था उसकी परवरिश गलत थी परन्तु वह फैसले पर सदेव अटल रहा इसी कारण उसे पहले स्वर्ग का भोग करने की प्राथमिकता है। और तुम ने अपने गुरु द्रोाचार्य को छल से मारा यह तुम्हारा सबसे बड़ा पाप था इसी कारण तुम्हे पहेल नरक भोगना पड़ेगा उसके पश्चात स्वर्ग की प्राप्ति होगी।


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