किले का इतिहास क्या है?
भानगढ़ एक प्राचीन स्थान है जो कि 16 वीं सदी के अंत में 1573 में राजा भगवंत दास के द्वारा निर्मित कराया गया था यह किला 300 सालो तक आबाद रहा भानगढ़ माधो सिंह की राजधानी रहा।जो कि राजा मानसिंह के भाई थे और अकबर के दीवान थे। राजा मानसिंह अकबर के बहुत खास थे।भानगढ़ में किला,मंदिर,बाज़ार,हवेली,गोपीनाथ मंदिर,सोमेश्वर मंदिर,मंगलादेवी और केसवराई मंदिर यहां स्थित है। इस किले को सप्तमहल भी कहा जाता था परन्तु अब यह 4 है महल बचे है
क्यों कहते है इसे भूतो का भानगढ़ - क्या है इसके पीछे का रहस्य?
कहा जाता कि भानगढ़ में एक राजकुमारी थी वो बहुत सुंदर थी वह इतनी सुन्दर थी कि उनकी सुंदरता की बाते दूर - दूर तक होती थी।उनके राज्य में रहने वाला तांत्रिक जिसका नाम सिंधु सेवड़ा था वो राजकुमारी को सुंदरता पर मोहित हो गया था। वह प्रतिदिन राजकुमारी को देखने के लिए उनके बाज़ार जाने के समय पर उनके पीछे जाता था और उनको देखता था परन्तु राजकुमारी ने कभी उसको मूड कर भी नहीं देखा। राजकुमारी को इत्र बहुत पसंद था तांत्रिक ने देखा कि राजकुमारी इत्र को बहुत पसंद करती है तो क्यू ना जादू कर के राजकुमारी को हासिल कर लिया जाए।
तांत्रिक काले जादू में महारथी था। उसने इत्र में वशीकरण का जादू कर के राजकुमारी के पास भिजवा दिया पर इस चीज की भनक राजकुमारी को लग चुकी थी राजकुमारी ने इत्र की शीशी गुस्से में आकर फेक दी इत्र की शीशी पत्थर पर टकराकर फुट गई तो उसका कला जादू इस पत्थर पर हो गया और वह पत्थर है उसकी मौत का कारण बना परन्तु उसने मरने से पहले उसने एक श्राप दिया कि यह जीवित सभी लोग जल्द है मर जाएंगे और उनकी आत्मा यही इसी महल में भटकती रहेगी और उसका श्राप सच हुआ कहा जाता है जल्दी है सब कुछ खत्म हो गया और उन सब की आत्मा आज भी भानगढ़ में भटकती है। कहा जाता है यहां लगने वाला बाज़ार भी प्रतिदिन रात्रि में लगता है इसलिए यहां किसी को भी 5 बजे बाद रुकने नहीं देते है।


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