रविवार, 21 जून 2020

Autobiography Of Narendra Modi In Hindi - Page of history

हेलो दोस्तों मे राहुल सिंह चौहान आपके लिए pageofhistory  मे आज  Autobiography Of Narendra Modi In Hindi लेकर आए  है | कि कैसा रहा उनका चाय बेचने से प्रधानमंत्री बनने  का सफर | 


डरते तो वह हैं जो अपनी छवि के लिए मरते हैं मैं तो Hindustan की छवि के लिए मरता हूं और इसीलिए किसी से भी नहीं डरता हूं ऐसा कहना है दुनिया की सबसे शक्तिशाली लोगों में शामिल है | 


History Of India In Hindi : -

भारत के इतिहास मे लोकप्रिय प्रधानमंत्री Narendra Modi का जिन्हें हमारे देश की राजनीति की वजह से आप प्यार करें या फिर नफरत लेकिन उनके कार्यों को अनदेखा नहीं कर सकते दोस्तों वैसे तो मोदी जी का जीवन बहुत ही साधारण तरीके से शुरू हुआ मगर अपनी देशभक्ति अपने जज्बे और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने ऐसी सफलता हासिल की जिसके बारे में कोई कुछ भी नहीं कह सकता था वे एक बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए |



Biography Of Narendra Modi -Pageofhistory



अपने बचपन के दिनों में जब बच्चे खेलने कूदने में अपना समय व्यतीत करते हैं तब उन्होंने अपने घर की आर्थिक सहायता के लिए अपने पिता की दुकान में हाथ बटाए और train की डिब्बों में जा जाकर चाय बेची लेकिन दोस्तों अगर आपके अंदर अपने देश के लिए कुछ कर जाने की इच्छा होना तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं रह जाता कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो आइए दोस्तों हम शुरू से मोदी जी के चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक की अद्भुत सफर को detail में जानते हैं |




Narendra Modi का जन्म 17 सितंबर 1950 को Mumbai राज्य के मैदान जिले में वडनगर नाम के गांव में हुआ था दो तो बता दूं कि Mumbai राज्य पहले भारत का एक राज्य था जिसे 1 मई 1960 में अलग कर गुजरात और महाराष्ट्र बना दिया गया तो इस तरह अब मोदी जी का जन्मस्थान गुजरात राज्य के अंतर्गत आता है |



Narendra Modi के पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी था और मां का नाम हीराबेन मोदी है जन्म के समय उनका परिवार बहुत ही गरीब था और वे एक छोटी सी कच्चे मकान में रहते थे Narendra Modi अपने माता पिता की कुल 6 संतानों में तीसरे पुत्र हैं मोदी के पिता Railway Station पर चाय की एक छोटी सी दुकान चलाती थी जिसमें नरेंद्र मोदी भी उनका हाथ बताते थे और रेल के डिब्बों में जा जाकर चाय बेचते थे लेकिन हां चाय की दुकान संभालने के साथ-साथ मोदी पढ़ाई लिखाई का भी पूरा ध्यान रखते थे मोदी के टीचर बताते हैं कि नरेंद्र पढ़ाई लिखाई में तो एक ठीक-ठाक छात्र थे लेकिन में नाटकों और भाषणों में जमकर हिस्सा लेते थे और उन्हें खेलकूद में भी बहुत दिलचस्पी थी उन्होंने अपनी स्कूल की पढ़ाई वडनगर से पूरी की




15 साल की उम्र में Narendra Modi की सगाई जशोदाबेन चमन लाल के साथ कर दी गई और फिर 17 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक न्यूज़ के अनुसार नरेंद्र और जसोदा ने कुछ वर्ष साथ रहकर बिताएं लेकिन कुछ समय बाद नरेंद्र मोदी के इच्छा से वे दोनों एक दूसरे के लिए अजनबी हो गए लेकिन नरेंद्र मोदी के जीवन लेखक ऐसा नहीं मानते हैं उनका मानना है कि उन दोनों की शादी जरूर हुई लेकिन वे दोनों एक साथ कभी नहीं रहे शादी के कुछ वर्षों बाद नरेंद्र मोदी ने घर छोड़ दिया और एक तरह से उनका वैवाहिक जीवन लगभग समाप्त हो गया |


Narendra Modi का मानना है कि एक शादीशुदा के मुकाबले अविवाहित व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ ज्यादा जोरदार तरीके से लड़ सकता है क्योंकि उसे अपनी पत्नी परिवार और बाल बच्चों की कोई चिंता नहीं रहती बचपन से ही मोदी में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी 1962 में जब भारत चीन युद्ध हुआ था उस समय मोदी Railway Staion पर जवानों से भरी ट्रेनों में उनके लिए खाना और चाय लेकर जाते थे 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय भी मोदी ने जवानों की खूब सेवा की थी |





1971 में RSS के प्रचारक बन गए और अपना पूरा समय RSS को देने लगे वह वहां सुबह 5:00 बजे उठ जाते और देर रात तक काम करते प्रचारक होने की वजह से मोदी जी ने गुजरात की अलग-अलग जगहों पर जाकर लोगों की समस्याओं को बहुत करीब से समझा और फिर भारतीय जनता पार्टी का आधार मजबूत करने में इंपॉर्टेंट रोल निभाया 1975 के आसपास में राजनीति क्षेत्रों में विवाद की वजह से उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कई राज्यों में आपातकालीन घोषित कर दिया था और तब RSS जैसी संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था फिर भी मोदी चोरी-छिपे देश की सेवा करते रहें और सरकार की गलत नीतियों का जमकर विरोध किया



उसी समय मोदी जी ने एक किताब भी लिखी थी जिसका नाम संघर्ष मा गुजरात था इस किताब में उन्होंने गुजरात के राजनीति के बारे में चर्चा किया था


उन्होंने RSS के प्रचारक रहते हुए 1980 में गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पीजी की Degree प्राप्त की आदत में बेहतरीन काम को देखते हुए भाजपा में नियुक्त किया गया जहां उन्होंने 1990 में आडवाणी की अयोध्या रथ यात्रा का भव्य आयोजन किया जिससे भाजपा के सीनियर लीडर काफी प्रभावित हुए आगे भी उनके अद्भुत कार्य की बदौलत भाजपा में उनका महत्व बढ़ता रहा था | 




आखिरकार मोदी की मेहनत रंग लाई और उनकी पार्टी ने गुजरात में 1995 के विधानसभा चुनाव में बहुमत में अपनी सरकार बना ली | 



लेकिन मोदी से कहासुनी होने के बाद शंकर सिंह बघेला ने पार्टी से रिजाइन दे दिया उसके बाद केशुभाई पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया गया और नरेंद्र मोदी को दिल्ली बुलाकर भाजपा में संगठन के लिए केंद्रीय मंत्री का रिस्पांसिबिलिटी दिया गया मोदी जी ने इस रिस्पांसिबिलिटी को भी बखूबी निभाया 2001 में केशुभाई पटेल की सेहत बिगड़ने लगी थी और भाजपा चुनाव में कई सीटें भी हार रही थी | इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने अक्टूबर 2001 में किस भाई पटेल की जगह नरेंद्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री का अपना पहला कार्यकाल 7 अक्टूबर 2001 से शुरू किया इसके बाद मोदी ने राजकोट विधानसभा चुनाव लड़ा जिसमें उन्होंने कांग्रेस पार्टी की अश्विन मेहता को बड़े अंतर से मात दी | 



मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए मोदी ने बहुत ही अच्छी तरीके से अपने कार्यों को संभाला और गुजरात को फिर से मजबूत कर दिया | 



उन्होंने गांव गांव तक बिजली पहुंचाई Tourism  को बढ़ावा दिया देश में पहली बार किसी राज्य की सभी नदियों को एक साथ जोड़ा गया जिससे पूरे राज्य में पानी की problem solve  हो गई | एशिया के सबसे बड़े सोलर पार्क का निर्माण भी गुजरात में हुआ और इन सबके अलावा भी उन्होंने बहुत सारे अद्भुत कार्य की और देखते ही देखते गुजरात को भारत का सबसे बेहतरीन राज्य बना दिया और वह खुद गुजरात के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री बन गए लेकिन उसी बीच मार्च 2002 में गुजरात के गोधरा कांड से नरेंद्र मोदी का नाम जोड़ा गया इस कांड के लिए Newyork Timesने मोदी प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया और फिर कांग्रेसी सहित अनेक विपक्षी दलों ने उनके इस्तीफे की मांग की दोस्तों गोधरा कांड में 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा नाम शहर में रेलवे स्टेशन पर साबरमती ट्रेन के एसी कोच में आग लगाए जाने के बाद 59 लोगों की मौत हो गई थी जिसके बाद पूरे गुजरात में सांप्रदायिक दंगे होना शुरू हो गए और फिर 28 फरवरी 2002 को गुजरात के कई इलाकों में दंगा बहुत ज्यादा भड़क गया जिसमें 12 सौ से अधिक लोग मारे गए इसके बाद इस घटना की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय ने विशेष जांच दल बनाई और फिर दिसंबर 2010 में जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया कि इन दंगों में नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला




Narendra Modi ने गुजरात में कई ऐसे हिंदू मंदिरों को भी ध्वस्त कराने में थोड़ा सा भी नहीं सोचा जो सरकारी कानून कायदों के मुताबिक नहीं बने थे | हालांकि इसके लिए उन्हें विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों का भी विरोध झेलना पड़ा लेकिन उन्होंने इसकी थोड़ी सी भी परवाह नहीं की और देश के लिए जो सही था उसी काम को करते रहे उनकी अच्छी डिसीजन और कार्यों की वजह से गुजरात के लोगों ने मोदी को 4 बार लगातार अपना मुख्यमंत्री बनाया गुजरात में मोदी की सफलता देखकर बीजेपी के सीनियर नेताओं ने मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव का प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया जिसके बाद मोदी ने पूरे भारत में बहुत सारी रैलियां की और साथ ही साथ उन्होंने Social Media का भी भरपूर लाभ उठाया और लाखों लोगों तक अपनी बात रखी मोदी के अद्भुत विकासशील कार्य उनकी प्रेरणादायक भाषण देश के लिए उनका प्यार और उनकी सकारात्मक सोच की वजह से उन्हें भारी मात्रा में वोट मिले और वे भारत के प्रधानमंत्री बने | 


नरेंद्र मोदी एक बहुत ही मेहनती व्यक्ति हैं वह 18 घंटे काम करते हैं और कुछ ही घंटे सोते हैं दोस्तों मोदी जी का कहना है कि कड़ी मेहनत कभी थकान नहीं लाती है वह तो बस संतोष लाती है नरेंद्र मोदी शुद्ध शाकाहारी हैं और नवरात्र के 9 दिन उपवास रखते हैं वे अपनी सेहत का भरपूर ध्यान रखते हैं और प्रतिदिन योग करते हैं भले ही वे कहीं पर भी हैं मोदी जी अपनी मां से बहुत प्यार करते हैं उनका कहना है कि मेरे पास अपनी बाबा दादा की ना ही एक पाई है और ना ही मुझे चाहिए मेरे पास अगर कुछ है तो अपनी मां का दिया हुआ आशीर्वाद है | 


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